करवा चौथ 24 अक्टूबर 2021 विधि कैसे- कब- क्या- करें जानने के लिए पढ़े |
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ करना चाहिए
'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।'
जानिये करवा चौथ में किस तरह से करनी होती है पूजा--- करवा चौथ यानी पति की लम्बी उम्र के लिए रखे जाने वाले व्रत का दिन होता है। छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही साथ इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणोश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल,उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समकक्ष किसी सुहागिन के पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए।
करवा चौथ व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha )---
महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।
साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।
साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया।
साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है।
चन्द्रोदय समय (Karwa Chauth Puja Timings)----
मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन बिना चन्द्रमा को अर्घ्य दिए व्रत तोड़ना अशुभ माना जाता है। वर्ष 2021 में पूजा और चन्द्रमा निकलने का समय निम्न है:
साल 2021 में करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त :---- शाम 05 बजकर 43 मिनट से लेकर 06 बजकर 59 मिनट तक
करवा चौथ के दिन चंद्रोदय: रात 08.07 बजे
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शरद पूर्णिमा 19 अक्टूबर 2021- क्या करे माता लक्ष्मी को खुश करने के लिए |
शरद पूर्णिमा 19-10-2021 को मनाई जाएगी। इस दिन पूरा चंद्रमा दिखाई देने के कारण इसे महापूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन चन्द्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण ने रासलीला भी की थी अतः इसे रासपूर्णिमा भी कहा जाता है।
शरद पूर्णिमा का महत्व | Significance of Sharad Poornima--
शरद पूर्णिमा , इस दिन कोई व्यक्ति किसी अनुष्ठान को करे, तो उसका अनुष्ठान अवश्य सफल होता है.
आश्विन मास कि पूर्णिमा सबसे श्रेष्ठ मानी गई है. इस पूर्णिमा को आरोग्य हेतु फलदायक माना जाता है. मान्यता अनुसार पूर्ण चंद्रमा अमृत का स्रोत है अत: माना जाता है कि इस पूर्णिमा को चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है. शरद पूर्णिमा की रात्रि समय खीर को चंद्रमा कि चांदनी में रखकर उसे प्रसाद-स्वरूप ग्रहण किया जाता है. मान्यता अनुसार चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा भोजन में समाहित हो जाती हैं जिसका सेवन करने से सभी प्रकार की बीमारियां आदि दूर हो जाती हैं. आयुर्वेद के ग्रंथों में भी इसकी चांदनी के औषधीय महत्व का वर्णन मिलता है खीर को चांदनी के में रखकर अगले दिन इसका सेवन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है.
क्या करें शरण पूर्णिमा पर--- इस दिन गाय के दूध से खीर बनाकर उसमें घी और चीनी मिलाकर रात्रि में चन्द्रमा की रोशनी में रख दें। सुबह इस खीर का भगवान को भोग लगाएं तथा घर के सभी सदस्य सेवन करें। इससे दिमाग तेज होता है। शरद पूर्णिमा को कोजोगार पूर्णिमा व्रत और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है. कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है. इस दिन चन्द्रमा व भगवान विष्णु का पूजन, व्रत, कथा की जाती है. धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं. इस दिन श्रीसूक्त, लक्ष्मीस्तोत्र का पाठ करके हवन करना चाहिए. इस विधि से कोजागर व्रत करने से माता लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं तथा धन-धान्य, मान-प्रतिष्ठा आदि सभी सुख प्रदान करती हैं.
शरद पूर्णिमा व्रत विधि | Sharad Purnima Vrat Vidhi
शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रात:काल में व्रत कर अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए. इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए.
ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए. लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है. इस दिन जागरण करने वाले की धन -संपत्ति में वृद्धि होती है.
इस व्रत को मुख्य रुप से स्त्रियों के द्वारा किया जाता है. उपवास करने वाली स्त्रियां इस दिन लकडी की चौकी पर सातिया बनाकर पानी का लोटा भरकर रखती है. एक गिलास में गेहूं भरकर उसके ऊपर रुपया रखा जाता है. और गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कहानी सुनी जाती है. गिलास और रुपया कथा कहने वाली स्त्रियों को पैर छुकर दिये जाते है. रात को चन्द्रमा को अर्ध्य देना चाहिए और इसके बाद ही भोजन करना चाहिए. मंदिर में खीर आदि दान करने का विधि-विधान है. विशेष रुप से इस दिन तरबूज के दो टुकडे करके रखे जाते है. साथ ही कोई भी एक ऋतु का फल रखा और खीर चन्द्रमा की चांदनी में रखा जाता है. ऎसा कहा जाता है, कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है.
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क्यों करते हैं नाग पंचमी पूजा ? और इसके उपाय
हिन्दुओं में नाग की देवता की तरह पूजा की जाती है और उनकी पूजा के कई कारण हैं, भगवान शिव शंकर के गले का हार और सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु की शैय्या माना जाता है , वहीं नाग पंचमी की पूजा को भगवान कृष्ण से भी जोड़कर देखा जाता है, भगवान कृष्ण के मामा ने उन्हें मारने के लिए कालिया नाम का नाग भेजा। एक दिन जब श्री कृष्ण अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे तो उनकी गेंद नदी में गिर गई। जैसे ही वह उस गेंद को लाने के लिए नदी में उतरे तो कालिया ने उन पर आक्रमण कर दिया, लेकिन कृष्ण के आगे नाग की एक न चली। उसने भगवान श्री कृष्ण से माफी मांगते हुए वचन दिया कि वो गांव वालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा और वहां से हमेशा-हमेशा के लिए चला जाएगा। कालिया नाग पर श्री कृष्ण की विजय को भी नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। सावन के महीने में जमकर वर्षा होती है जिस वजह से नाग जमीन के अंदर से निकलकर बाहर आ जाते हैं. ऐसे में माना जाता है कि अगर नाग देवता को दूध पिलाया जाए और उनकी पूजा-अर्चना की जाए तो वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने के ज्योतिषीय कारण भी हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में योगों के साथ-साथ दोषों को भी देखा जाता है। कुंडली के दोषों में कालसर्प दोष एक बहुत ही महत्वपूर्ण दोष होता है। काल सर्प दोष भी कई प्रकार का होता है। इस दोष से मुक्ति के लिये भी ज्योतिषाचार्य नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने के साथ-साथ दान दक्षिणा का महत्व बताते हैं।
नाग पंचमी पर क्या करें क्या न करें
इस दिन भूमि की खुदाई नहीं की जाती। नाग पूजा के लिये नागदेव की तस्वीर या फिर मिट्टी या धातू से बनी प्रतिमा की पूजा की जाती है। दूध, धान, खील और दूब चढ़ावे के रूप मे अर्पित की जाती है। सपेरों से किसी नाग को खरीदकर उन्हें मुक्त भी कराया जाता है। जीवित सर्प को दूध पिलाकर भी नागदेवता को प्रसन्न किया जाता है।
1. नाग पंचमी के दिन चांदी या तांबे धातु से बने नाग-नागिन का जोड़ा ले और उसका पूजन करने के पश्चात् बहते हुए जल में प्रभावित कर दें।
2.आपकी कुंडली में यदि काल सर्प योग या सर्प दोष है तो नाग पंचमी के दिन किसी ऐसे शिव मंदिर में जहां शिवजी पर नाग नहीं हो वहां प्रतिष्ठित करवाएं। इस उपाय को करने से आपको नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
3.नाग पंचमी के दिन शिवजी को चंदन की लकड़ी या चंदन का इत्र चढ़ाएं और नित्य स्वयं लगाएं। ऐसा करने से आपको भगवान शिव का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।
4.नाग पंचमी के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंगि पर विजया, अर्क पुष्प, धतूर पुष्प, फल चढ़ाएं तथा दूध से रुद्राभिषेक करवाएं।
5. नाग पंचमी की पूजा में इन मंत्रों का जाप अवश्य करें। 'ॐ नागदेवतायै नम:' या नाग पंचमी मंत्र 'ॐ नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नौ सर्प प्रचोद्यात्.'
6.आपकी कुंडली में यदि काल सर्प योग या सर्प दोष या राहु की दशा है तो नाग पंचमी के दिन किसी ऐसे शिव मंदिर में जहां शिवजी पर नाग नहीं हो वहां प्रतिष्ठित करवाएं। इस उपाय को करने से आपको नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
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चन्द्रमा के उपाय/दान/क्या न करें...........................
चन्द्रमा के उपाय-
दान- चन्द्रमा के नीच अथवा मंद होने पर शंख का दान करना उत्तम होता है. इसके अलावा सफेद वस्त्र, चांदी, चावल, भात एवं दूध का दान भी पीड़ित चन्द्रमा वाले व्यक्ति के लिए लाभदायक होता है. जल दान अर्थात प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना से भी चन्द्रमा की विपरीत दशा में सुधार होता है. अगर आपका चन्द्रमा पीड़ित है तो आपको चन्द्रमा से सम्बन्धित रत्न दान करना चाहिए. चन्दमा से सम्बन्धित वस्तुओं का दान करते समय ध्यान रखें कि दिन सोमवार हो और संध्या काल हो. ज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा से सम्बन्धित वस्तुओं के दान के लिए महिलाओं को सुपात्र बताया गया है अत: दान किसी महिला को दें. आपका चन्द्रमा कमज़ोर है तो आपको सोमवार के दिन व्रत करना चाहिए. गाय को गूंथा हुआ आटा खिलाना चाहिए तथा कौए को भात और चीनी मिलाकर देना चाहिए. किसी ब्राह्मण अथवा गरीब व्यक्ति को दूध में बना हुआ खीर खिलाना चाहिए. सेवा धर्म से भी चन्द्रमा की दशा में सुधार संभव है. सेवा धर्म से आप चन्द्रमा की दशा में सुधार करना चाहते है तो इसके लिए आपको माता और माता समान महिला एवं वृद्ध महिलाओं की सेवा करनी चाहिए
.कुछ मुख्य बिन्दु निम्न है-- व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए। रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से बचना चाहिए। रात्रि में ऐसे स्थान पर सोना चाहिए जहाँ पर चन्द्रमा की रोशनी आती हो। ऐसे व्यक्ति के घर में दूषित जल का संग्रह नहीं होना चाहिए। वर्षा का पानी काँच की बोतल में भरकर घर में रखना चाहिए। वर्ष में एक बार किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान अवश्य करना चाहिए। सोमवार के दिन मीठा दूध नहीं पीना चाहिए। सफेद सुगंधित पुष्प वाले पौधे घर में लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
क्या न करें-
ज्योतिषशास्त्र में जो उपाय बताए गये हैं उसके अनुसार चन्द्रमा कमज़ोर अथवा पीड़ित होने पर व्यक्ति को प्रतिदिन दूध नहीं पीना चाहिए. स्वेत वस्त्र धारण नहीं करना चाहिए. सुगंध नहीं लगाना चाहिए और चन्द्रमा से सम्बन्धित रत्न नहीं पहनना चाहिए.
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गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते हैं। भारत भर में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुपूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा को वेद व्यास जयंती या व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: यानि गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।
अपने गुरू का सम्मान करने के लिये इससे अच्छा दिन और कोई हो ही नहीं सकता, प्राचीन काल से इस दिन विद्यार्थियों द्वारा अपने-अपने गुरूओं का सम्मान किया जाता है, इस दिन गुरू को गुरूदक्षिणा दी जाती है, गुरुदक्षिणा गुरु के प्रति सम्मान व समर्पण भाव है, उनका आदर सत्कार किया जाता है और गुरू का आर्शीवाद लिया जाता है।
उपाय :-
गुरु पूर्णिमा के दिन भोजन में केसर का प्रयोग करें और स्नान के बाद नाभि तथा मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।
गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु के पास जाये उनको पुष्प भेंट करें, उनकी कृपादृष्टि अवश्य ही प्राप्त करें ।
गुरु पूर्णिमा के दिन अपने माता -पिता, बड़े भाई-बहन आदि को भी उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी अवश्य ही ग्रहण करना चाहिए ।
गुरु पूर्णिमा के दिन अगर आपका कोई गुरु नहीं है तो अपने इष्ट देव को अपना गुरु मान के उनका पूजन कारण और प्रसाद चढ़ाएं।
इस दिन गाय की सेवा भी करनी चाहिए, गाय को गुड़ चना, हरा चारा खिलाने से परिवारिक सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है , कार्यों में आ रही अड़चने दूर होती है ।
अपने व्यापार / कारोबार में तेजी लाने के लिए समस्त संकटो को दूर करने के लिए इस दिन किसी गरीब असहाय को पीले अनाज, पीले वस्त्र, पीली मिठाई दक्षिणा के साथ दान करना चाहिए।
इस दिन केले के एवं पीपल के वृक्ष की पूजा करें।
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सावन की शिवरात्रि
श्रावण मास में आने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। वैसे तो पूरा श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है, सावन महीने के दौरान आने वाली मास शिवरात्रि को बहुत ही शुभ माना जाता।
उपाय--
महाशिवरात्रि के दिन अगर किसी पर भी राहु और शनि का साया है तो, भगवान शिव की पूजा कीजिये आपको वो हर कष्ट से मुक्ति दिला देंगे।कुंडली के बुरे योग गंभीर और मृत्यु समान शारीरिक परेशानियों और मानसिक परेशानियों को दूर करने में,इन ग्रहो के आधार पर ही व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग और पितृ दोष बनते है , जिनसे लाइफ में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भगवान शिव को गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची चढाएं इसके बाद शिव गायत्री मंत्र का जाप करे । यह मंत्रग्रह पीड़ा ही दूर नहीं करता बल्कि मनचाहे फल भी देता है ।
शिव गायत्री मंत्र-
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे। महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।।
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मंगल के उपाय/दान/क्या न करें.............
मंगल के उपाय--
पीड़ित व्यक्ति को लाल रंग का बैल दान करना चाहिए. लाल रंग का वस्त्र, सोना, तांबा, मसूर दाल, बताशा, मीठी रोटी का दान देना चाहिए. मंगल से सम्बन्धित रत्न दान देने से भी पीड़ित मंगल के दुष्प्रभाव में कमी आती है. मंगल ग्रह की दशा में सुधार हेतु दान देने के लिए मंगलवार का दिन और दोपहर का समय सबसे उपयुक्त होता है. जिनका मंगल पीड़ित है उन्हें मंगलवार के दिन व्रत करना चाहिए और ब्राह्मण अथवा किसी गरीब व्यक्ति को भर पेट भोजन कराना चाहिए. मंगल पीड़ित व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 10 से 15 मिनट ध्यान करना उत्तम रहता है. मंगल पीड़ित व्यक्ति में धैर्य की कमी होती है अत: धैर्य बनाये रखने का अभ्यास करना चाहिए एवं छोटे भाई बहनों का ख्याल रखना चाहिए. लाल कपड़े में सौंफ बाँधकर अपने शयनकक्ष में रखनी चाहिए। ऐसा व्यक्ति जब भी अपना घर बनवाये तो उसे घर में लाल पत्थर अवश्य लगवाना चाहिए। बन्धुजनों को मिष्ठान्न का सेवन कराने से भी मंगल शुभ बनता है। लाल वस्त्र ले कर उसमें दो मुठ्ठी मसूर की दाल बाँधकर मंगलवार के दिन किसी भिखारी को दान करनी चाहिए। मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर ले कर उसका टीका माथे पर लगाना चाहिए। बंदरों को गुड़ और चने खिलाने चाहिए। अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए। मंगल के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
क्या न करें
आपका मंगल अगर पीड़ित है तो आपको अपने क्रोध नहीं करना चाहिए. अपने आप पर नियंत्रण नहीं खोना चाहिए. किसी भी चीज़ में जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए और भौतिकता में लिप्त नहीं होना चाहिए
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शुभ मोर के पंखों से लाभ---.........
शुभ मोर के पंखों से लाभ--
1--घर के दक्षिण-पूर्व कोण में लगाने से बरकत बढती है. व अचानक कष्ट नहीं आता है. 2--यदि मोर का एक पंख किसी मंदिर में श्री राधा-कृष्ण कि मूर्ती के मुकुट में ४० दिन के लिए स्थापित कर प्रतिदिन मक्खन-मिश्री का भोग सांयकाल को लगाए, ४१वें दिन उसी मोर के पंख को मंदिर से दक्षिणा-भोग दे कर घर लाकर अपने खजाने या लाकर्स में स्थापित करें. तो आप स्वयं ही अनुभव करेंगे कि धन,सुख-शान्ति कि वृद्धि हो रही है. सभी रुके कार्य भी इस प्रयोग के कारण बनते जा रहे है. 3--काल-सर्प के दोष को भी दूर करने की इस मोर के पंख में अद्भुत क्षमता है.काल-सर्प वाले व्यक्ति को अपने तकिये के खौल के अंदर 7 मोर के पंख सोमवार रात्री काल में डालें तथा प्रतिदिन इसी तकिये का प्रयोग करे. और अपने बैड रूम की पश्चिम दीवार पर मोर के पंख का पंखा जिसमे कम से कम 11 मोर के पंख तो हों लगा देने से काल सर्प दोष के कारण आयी बाधा दूर होती है. 4--बच्चा जिद्दी हो तो इसे छत के पंखे के पंखों पर लगा दे ताकि पंखा चलने पर मोर के पंखो की भी हवा बच्चे को लगे धीरे-धीरे हठ व जिद्द कम होती जायेगी. 5--जैसे कि पहलें वर्णन किया कि मोर व सर्प में शत्रुता है अर्थात सर्प, शनि तथा राहू के संयोग से बनता है. यदि मोर का पंख घर के पूर्वी और उत्तर-पश्चिम दीवार में या अपनी जेब व डायरी में रखा हो तो राहू का दोष कभी भी नहीं परेशान करता है. तथा घर में सर्प, मच्छर, बिच्छू आदि विषेलें जंतुओं का भय नहीं रहता है. 6--नवजात बालक के सिर की तरफ दिन-रात एक मोर का पंख चांदी के ताबीज में डाल कर रखने से बालक डरता नहीं है तथा कोई भी नजर दोष और अला-बला से बचा रहता है. 7--यदि शत्रु अधिक तंग कर रहें हो तो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिन्दूर से मंगलवार या शनिवार रात्री में उसका नाम लिख कर अपने घर के मंदिर में रात भर रखें प्रातःकाल उठकर बिना नहाये धोए चलते पानी में भा देने से शत्रु, शत्रुता छोड़ कर मित्रता का व्यवहार करने लगता है.
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घर में बरकत होने लगेगी इन छोटे सरल उपाय द्वारा कैसे जानने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें ..----
घर में बरकत के लिए --
--बुधवार को पहले किन्नरों को कुछ पैसे दान दे फिर कुछ पैसे उनसे उनके पास से आशीर्वाद के रूप में ले ले. उन पैसो को पूजा के स्थान पर रखकर धुप बत्ती दिखाए और हरे कपडे में लपेटकर धन वाले स्थान पर रख दे.
--साईं जी की ९ परिक्रमा करे अपनी आवश्यकता को मन में दोहराए , गुलाब की अगरबती जलाये , श्वेत वस्त्र पहन कर करें . लाभ होगा.
--11 पीपल के पत्तो को गंगाजल से धोकर 7 मंगलवार ७ बार राम लाल चन्दन से लिखकर हनुमान जी को चढ़ाएं
--शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार को सफेद कपडे के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगायें .
--पति से कहे कि पायल शुक्रवार को खरीद कर आपको गिफ्ट करे सलिल के कपडे पर रखकर लक्ष्मी जी के सामने 5बार उनपर केसर का तिलक करे, माँ से प्रार्थना करे कि माँ धन आये, श्री सूक्त का पथ करें , 15 मिनट बाद पहन ले , जब भी पूजा करे दो बार छनका ले और खुशियों कि प्रार्थना करें.
--चांदी कि बांसुरी को लाल साटन के कपडे में बांधकर लक्ष्मी जी कि तरह पूजा करे फिर लक्ष्मी जी की पूजा करे फिर श्री सूक्त का पथ करे फिर थोड़ी देर के बाद बांसुरी को उठाकर धन वाले स्थान पर रख दे.
--पीपल के पत्ते पर राम लिखकर तथा कुछ मीठा रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। इससे धन लाभ होने लगेगा।
--भगवान शंकर को प्रतिदिन सुबह चावल तथा बिल्व पत्र चढ़ाएं। शीघ्र ही आपकी धन की इच्छा पूरी होगी।
--प्रत्येक शुक्लपक्ष की नवमी को 7 मुठ्ठी काले तिल पारिवारिक सदस्यों के ऊपर से 7 बार उसार कर उत्तर दिशा में फेंक दे। धन हानि नहीं होगी।
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परीक्षा/प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए कुछ खास उपाय----
1.इमली के ताजे पत्ते गुरुवार को अपनी किताबों में रखने से भी विधार्थी की बुद्धि तेज होती है ।
2.मोर का पंख अपने पास रखने से विधार्थी का अपने स्कूल कालेज में सम्मान बड़ता है ।
3.तुलसी के पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर प्रतिदिन उसका रस विधार्थी को पिलाने से भी उसकी स्मरण शक्ति का विकास होता है । 4.किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्ति हेतु हर गुरुवार को नियम से किसी भी गाय को पीले पेड़े अवश्य खिलाये । 5.बुधवार को गणपति जी को बेसन के लड्डू और दूर्वा अर्पित करें, विद्यार्थी को चाहिए की वह अपनी पड़ाई की मेज या कमरे की ईशान की दीवार पर माँ सरस्वती की तस्वीर जरुर लगायें और रोज उनसे बेहतर विद्या प्राप्ति के लिए आग्रह करें
6.जिन विद्यार्थियों को परीक्षा में उत्तर भूल जाने की आदत हो, उन्हें परीक्षा में अपने पास कपूर और फिटकरी रखनी चाहिए। इससे मानसिक रूप से मजबूती बनी रहती है और यह नकारात्मक ऊर्जा को भी हटाती हैं । 7.विद्यार्थियों के कमरे में यथासंभव हरे रंग के परदे लगवाने चाहिए इससे एकाग्रता आती है और मन भी शांत रहता है ।
8. विद्यार्थियों के कमरे में दीवार पर नीम की डाली लगनी चाहिए इससे कमरे में शुद्ध हवा के साथ साथ सकारात्मक उर्जा का भी प्रभाव बना रहता है । 9.विद्यार्थियों के कमरे में दीवार पर नीम की डाली लगनी चाहिए इससे कमरे में शुद्ध हवा के साथ साथ सकारात्मक उर्जा का भी प्रभाव बना रहता है ।
1०.भगवान गणोश जी को हर बुधवार के दिन दूर्वा चढ़ाने से बच्चों में कुशाग्र बुद्धि विकसित होती है।
11.परीक्षा में जाने से पूर्व मीठे दही पर तुलसी के पत्ते रखकर ग्रहण करके घर से निकलें। 12.परीक्षा के लिए घर से जाते समय किसी भी मंदिर में आधा किलो दूध देकर जाये ईश्वर की कृपा से आपमें प्रबल आत्मविश्वास बना रहेगा 13.125 ग्राम बादाम और 125 ग्राम सौंफ को मिलाकर बारीक़ कूट लें । इसको प्रतिदिन एक तोला रात में सोते समय पानी के साथ ले लें । शरीर स्वस्थ रहेगा दिमाग और नज़र दोनों ही तेज़ होते है । 14.किसी शुभ मुहूर्त में लाल सुलेमानी हक़ीक को धारण करने से भी दिमाग तेज़ होता है ...निर्णय लेने में आसानी रहती है । 15. बच्चो की पड़ाई में सफलता के लिए शुक्ल पक्ष के ब्रहस्पतिवार को सवा मीटर पीले कपड़े में 2 किलो चने की दाल बांधकर किसी भी लक्ष्मी नारायण मंदिर में दे आयें और प्रभु से अपने बच्चो की शिक्षा में सर्वश्रेष्ठ सफलता के लिए प्रार्थना करें । ऐसा लगातार 5 ब्रहस्पतिवार को अवश्य ही करें 14.अष्ट सरस्वती यंत्र को गले में धारण करवाने से भी विधार्थी की बुद्धि का विकास होता है । 15.उत्तर दिशा में मुंह करके पिरामिड की आकृति की टोपी पहनकर पढ़ाई करने से पढ़ा हुआ बहुत शीघ्र याद होता है। टोपी, कागज, गत्ता या मोटे कपड़े की बनाई जा सकती है। 16 .पड़ने की मेज पर खाना नहीं खाना चाहिए , खाना खाते समय पड़ाई की टेबिल पर कॉपी किताबें बंद करके ,खाना खाने के लिए बनाये गए स्थान पर ही खाना चाहिए । 17. हमेशा पड़ाई प्रारंभ करते समय अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए कॉपी किताबों को अपने मस्तक से लगाकर पड़ाई शुरू करें , यही प्रक्रिया पड़ाई को समाप्त करते समय भी दोहराएँ । 18.शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाईयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। पीछे मुड़कर न देखें, सीधे अपने घर आ जाएं। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें। यह उपाय माता-पिता भी अपने बच्चे के लिये कर सकते है|
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पितृदोष के लक्षण और निवारण----
पितृदोष के लक्षण और निवारण----
—–घर में आय की अपेक्षा खर्च बहुत अधिक होता है। —-घर में लोगों के विचार नहीं मिल पाते जिसके कारण घर में झगडे होते रहते है। —–अच्छी आय होने पर भी घर में बरकत नहीं होती जिसके कारण धन एकत्रित नहीं हो पाता। —–संतान के विवाह में काफी परेशानीयां और विलंब होता है। —–शुभ तथा मांगलीक कार्यों में काफी दिक्कते उठानी पडती है। —-अथक परिश्रम के बाद भी थोडा-बहुत फल मिलता है। —-बने-बनाए काम को बिगडते देर नहीं लगती। उपाय पड़ने के लिए नीचे लिंक पर या फ़ोटो पर क्लिक करें--
इन उपायों से होगा लाभ----
1-घर में कभी-कभी गीता पाठ करवाते रहना चाहिए। 2-प्रत्येक अमावस्या को ब्राहमण भोजन अवश्य करवायें। 3-ब्राहमण भोजन में पूर्वजों की मनपसंद खाने की वस्तुएं अवश्य बनायी जाए। 4-ब्राहमण भोजन में खीर अवश्य बनाए। 5-हर रोज कम से कम पच्चीस मिनट के लिए खिड़की जरुर खोलें, इससे कमरे से नकारात्मक उर्जा बाहर निकल जाएगी और साथ ही सूरज की रोशनी के साथ घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवेश हो जाएगा। 6-प्रत्येक मास का प्रथम दिन अग्निस्वरूप होता है। इस दिन अग्नि पूजा अवश्य करनी चाहिए। अग्नि सब प्रकार के गुणों को प्रज्वलित करती है और वास्तु में अग्नि तत्त्व को क्रियाशील करती है। अग्नि की पूजा करने वाला तेजस्वी बनता है। 7-साल में एक दो-बार हवन करें। 8-घर में अधिक कबाड़ एकत्रित ना होने दें। 9-शाम के समय एक बार पूरे घर की लाइट जरूर जलाएं। 10-घर में हमेशा चन्दन और कपूर की खुशबु का प्रयोग करें। 11-घर या वास्तु के मुख्य दरवाजे में प्रतिदिन सुबह मुख्य द्वार के सामने हल्दी, कुमकुम से स्वास्तिक, कलश आदि आकारों से रंगोली बनाकर देहरी एवं रंगोली की पूजा कर परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि ‘हे ईश्वर ! मेरे घर व स्वास्थ्य की अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करें।’ आधुनिक वातावरण में संभव न हो तो गौमूत्र से बनी फिनाइल का उपयोग भी उपयुक्ति फल देता है। 12-प्रवेश द्वार के ऊपर बाहर की ओर गणपति अथवा हनुमानजी का चित्र लगाना एवं आम, अशोक आदि के पत्ते का तोरण (बंदनवार) बाँधना भी मँगलकारी है।
13-यदि पीने के पानी का स्थान उत्तर या उत्तर-पूर्व में भी है तो भी उसे उचित माना गया है और उस पर भी पितृ के निमित्त दीपक लगाने से पितृदोष का नाश होता है क्योंकि पानी में पितृ का वास माना गया है और पीने के पानी के स्थान पर उनके नाम का दीपक लगाने से पितृदोष की शांति होती है ऐसी मान्यता है..
14-प्रत्येक अमावस्या के दिन अपने पितरों का ध्यान करते हुए पीपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी, थोड़ा गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें और 'ॐ पितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करें। उसके बाद पितृसूक्त का पाठ करना शुभ फल प्रदान करता है।
15-प्रत्येक संक्रांति, अमावस्या और रविवार के दिन सूर्य देव को ताम्र बर्तन में लाल चंदन, गंगा जल और शुद्ध जल मिलाकर 'ॐ पितृभ्य: नम:' का बीज मंत्र पढ़ते हुए तीन बार अर्घ्य दे।
16-प्रत्येक अमावस्या के दिन दक्षिणाभिमुख होकर दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करना चाहिए। पितृस्तोत्र या पितृसूक्त का पाठ करना चाहिए।
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बाँसुरी एक उपाय अनेक-------
विश्वास हो तो आजमा कर देखे बांसुरी कर देगी आप के दुःखों परेशानी को अलविदा
आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि वैसे तो कई तरह की बांसुरियां होती है जो अलग अलग असर दिखाती है लेकिन बांस से बनी बांसुरी और चांदी की बांसुरी विशेष असर दिखाने वाली और कमाल की होती है। - चांदी की बांसुरी अगर आपके घर में होगी तो उस घर में पैसों से जूड़ी कोई परेशानी नहीं होगी। - सोने की बांसुरी घर में रखने से उस घर में लक्ष्मी रहने लग जाती है और ऐसे घर में पैसा ही पैसा होता है। - बाँस के पौधे से बनी होने के कारण लकड़ी की बांसुरी शीघ्र उन्नतिदायक प्रभाव देती है अत: जिन व्यक्तियों को जीवन में पर्याप्त सफलता प्राप्त नहीं हो पा रही हो, अथवा शिक्षा, व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो, तो उसे अपने बैडरूम के दरवाजे पर दो बाँसुरियों को लगाना चाहिए। - यदि घर में बहुत ही अधिक वास्तु दोष है, या दो से अधिक दरवाजे एक सीध में है, तो घर के मुख्यद्वार के ऊपर दो बांसुरी लगाने से लाभ मिलता है तथा वास्तु दोष धीरे धीरे समाप्त होने लगता है। - घर का कोई सदस्य अगर बहुत दिनों से बीमार हों या अकाल मृत्यु का डर या अन्य कोई स्वास्थ्य से सम्बन्धित बड़ी समस्या हो, तो प्रत्येक कमरें के बाहर और बीमार व्यक्ति के सिरहाने पर बांसुरी का प्रयोग करना चाहिए इससे बहुत जल्दी असर होने लगेगा। - चांदी या बांस से बनी बांसुरी के बारे में एक जबरदस्त कमाल की बात ये है कि जब ऐसी बांसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है, तो बुरी आत्माएं दूर हो जाती है और जब इसे बजाया जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि घरों में शुभ चुम्बकीय प्रवाह का प्रवेश होता है। -निःसंतान दम्पति एक चाँदी की बाँसुरी लेकर जन्माष्टमी पर कृष्ण जी को चढ़ाये और मन्नत मांगे संतान के लिये। - सिर के ऊपर बीम या टांड होने पर दो बाँसुरी को दोनों कोनो पर 45 डिग्री के कोण में लगा दे । कुछ उपाय धर्म से संबंधित होते हैं तो कुछ ज्योतिष के और कुछ वास्तु से संबंधित। यदि आपके घर में कुछ नेगेटिव हो रहा है तो यह परंपरागत उपाय अपनाने चाहिए। जिस घर में बांसुरी रखी होती है वहां के लोगों में परस्पर प्रेम बना रहता है साथ ही श्रीकृष्ण की कृपा से सभी दुख और पैसों की तंगी भी दूर हो जाती है। घर में बांसुरी ऐसे स्थान पर रखनी चाहिए जहां से वह आसानी से नजर आती रहे। किसी दीवार पर भी सुंदर सी बांसुरी लगाई जा सकती है। इससे घर की सुंदरता भी आकर्षक हो जाएगी। शास्त्रों के अनुसार बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। वे सदा ही इसे अपने साथ रखते हैं। इसी वजह से इसे बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है। साथ ही ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जब भी बांसुरी बजाते तो सभी गोपियां प्रेम वश प्रभु के समक्ष जा पहुंचती थीं। बांसुरी से निकलने वाले स्वर प्रेम बरसाने वाला ही है। इसी वजह से जिस घर में बांसुरी रखी होती है वहां प्रेम और धन की कोई कमी नहीं रहती है। सामान्यत: घर में बांस की बनी हुई बांसुरी ही रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार इस बांसूरी से घर के वातावरण में मौजूद समस्त नेगेटिव एनर्जी समाप्त हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। परिवार के सदस्यों के विचार सकारात्मक होते हैं जिससे उन्हें सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। विद्वानों के अनुसार इस बांसुरी से घर के वातावरण में मौजूद समस्त नेगेटिव एनर्जी समाप्त हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। परिवार के सदस्यों के विचार सकारात्मक होते हैं जिससे उन्हें सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।घर में बांसुरी ऐसे स्थान पर रखनी चाहिए जहां से वह आसानी से नजर आती रहे।
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क्या आपका काम या और किसी में मन नहीं लगता ??? ?? तो कहा पर कौन सी पेंटिंग लगाएं जानने के लिए पढ़े---
क्या आपका काम या और किसी में मन नहीं लगता ??? ?? तो कहा पर कौन सी पेंटिंग लगाएं जानने के लिए पढ़े---
काम करना तो चाहते हैं पर आपका ध्यान दूसरी ही जगह भटकता रहता है। जीवन में इतनी समस्याएं हैं कि एक जाती है तो दूसरी आ जाती है। कभी आप अपना काम सहीं से नहीं कर पाते हैं। दिमाग में एक साथ कई सारे विचार कौंधने लगते है और विचारों में आप इतना खो जाते हैं कि आप काम शुरू करने से पहले ही अपने आप को उर्जाहीन महसुस करने लगते हैं। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो
1--आपको अपने घर के स्टडी रुम में बगुले की तस्वीर लगाना चाहिए।
2--आप अगर हमेशा खुशी से भरे रहना चाहते हैं तो अपने कार्यस्थल पर दौड़ते हुए सफेद घोड़े का चित्र लगाएं।
3--अगर आप छोटी- छोटी बातों पर मायुस हो जाते है तो अपने बेडरुम में नाचते हुए मोर का चित्र लगाए।
4--अपने ऑफिस केबिन पर टेबल की पीछे की दीवार पर पर्वत का चित्र लगाएं।
5--घर के ईशान्य कोण में झरने का चित्र लगाएं।
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घर में हमेशा रहेगी पॉजिटीव एनर्जी-
घर में हमेशा रहेगी पॉजिटीव एनर्जी---
फेंगशुई में कई उपाय ऐसे कारगर उपाय बताए गए हैं। जिनका इस्तेमाल कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है। 1-तीन पुराने चीनी सिक्कों को लाल रंग के धागे अथवा रिबन में बांध कर अपने घर के हैंडल में लटका सकते हैं ये सिक्के दरवाजे के अंदर की ओर लटकाने चाहिए न कि बाहर की ओर। घर के सभी दरवाजों के हैंडल में सिक्के न लटकाएं केवल मुख्य द्वार के हैंडल में सिक्के लटकाएं क्योंकि इससे घर में आने वाले हर व्यक्ति के प्रवेश के साथ ही घर की सकारात्मक उर्जा बढ़ती है।
2--आप दरवाजे के बाहर वाले हैंडल में छोटी घंटी भी लटका सकते हैं। यह घंटी आपके घर में अच्छे समय के प्रवेश का सूचक है सिक्के घर में सम्पत्ति आ जाने के प्रतीक हैं,
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मनोकामना पूरी करने वाली है हनुमान चालीसा की चौपाईया --
हनुमान चालीसा सिर्फ हनुमान जी को खुश करने का साधन ही नहीं बल्कि आपकी मनोकामना पूरी करने का सबसे सरल उपाय है। तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा में कुल 40 चौपाई है।
हर चौपाई का अपना अलग महत्व है जिसकी साधना आप अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए कर सकते हैं। यानी आपकी जैसी मनोकामना है उसी अनुसार चौपाई का पाठ करें। चौपाई के पाठ से मनोकामना पूरी करने के लिए कुछ सामान्य से नियम हैं जिनका पालन जरूरी है। पाठ शुरु करने से पहले भगवान श्री राम और हनुमान जी की पूजा करें। इसके बाद जैसी कामना हो उस अनुसार चौपाई का ध्यान करें और कम से कम 40 दिनों तक नियमित उस चौपाई का 108 बार जप करें।
1--श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार।। इस दोहे के पाठ से स्मरण शक्ति और बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। स्वास्थ्य के मामले में भी यह चौपाई लाभप्रद रहती है।
2-नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥ इस चौपाई के पाठ से रोग दोष का नाश होता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में इन चौपाई का जप लाभप्रद माना गया है।
3-संकट तै हनुमान छुडावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥ हनुमान चालीसा की यह 26 वीं चौपाई है जिसके पाठ से संकट और परेशानियों से मुक्ति मिलती है। ग्रह दोष या किसी अन्य कारणों से जीवन में कठिन समय चल रहा हो तब इसक पाठ लाभप्रद रहता है।
4-अंतकाल रघुवरपुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥ जो व्यक्ति मुक्ति की कामना करते हैं और मृत्यु के बाद नर्क की यातना से बचना चाहते हैं उन्हें इस चौपाई का पाठ करना चाहिए।
5-तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥ पद प्रतिष्ठा की इच्छा रखने वालों को हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ करना चाहिए।
6-अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥३१॥ धन्य धान्य और सिद्धियां हासिल करने के लिए हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ करें।
7-भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥१०॥ शत्रु और विरोधी आपको परेशान कर रहे हैं तो हनुमान चालीसा की दसवीं चौपाई का पाठ नियमित करें।
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कृष्णा की तस्वीर दूर करेगी वास्तुदोष---
कृष्णा की तस्वीर दूर करेगी वास्तुदोष---
श्री कृष्ण का हर स्वरूप इतना सुन्दर है। उनके हर स्वरूप के दर्शन से मन सकारात्मक उर्जा से भर जाता है। वास्तु के अनुसार घर में कृष्ण की तस्वीर लगाना बहुत शुभ माना गया है, तो आइए जानते की घर के किस कोने में कृष्ण के किस स्वरूप की तस्वीर शुभ फल देने वाली मानी जाती है।
– कृष्णा का मक्खन खाता हुआ चित्र रसोई घर में लगाना वास्तु के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है।
– संतान सुख की प्राप्ति के लिए श्री कृष्ण के बालस्वरूप का चित्र बेडरुम में लगाएं।
– ध्यान रखें कि कृष्ण का फोटो स्त्री के लेटने के समय बिल्कुल मुख के सामने की दीवार पर रहे।
– यूं तो पति-पत्नी के कमरे में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तुशास्त्र में निषिद्ध है फिर भी राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं। इससे रिश्ता अच्छा होता है।
– भवन में महाभारत के युद्ध दर्शाने वाली तस्वीर वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं माना जाता इसलिए ऐसे चित्र घर में न लगाएं।
– भगवान श्रीकृष्ण का चित्र आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों ही स्थानों पर रखा जाना चाहिए, इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
– भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दृश्यों की तस्वीरों को भवन की पूर्व दिशा पर लगाया जा सकता है।
– वसुदेव द्वारा कृष्ण को टोकरी में लेकर नदी पार करने वाला फोटो को घर में लगाने से घर से कई तरह की समस्या दूर होने लगती है।
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कैरियर में जल्द सफलता मिले तो.....
अगर कोई व्यक्ति चाहता है कि उसे कैरियर में जल्द सफलता मिले तो उसे अपने घर या ऑफिस के वास्तु में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।---
1--आपके घर या दफ्तर में आपकी नेमप्लेट आगुंतको(guest) को स्पष्ट रूप से नजर आनी चाहिए। कैरियर में सफलता के लिए नेमप्लेट पर रात के वक्त रोशनी डालें।
2--कैरियर में सफलता प्राप्ति के लिए उत्तर(North) दिशा में जंपिंग फिश, डॉल्फिन या मछलियों के जोड़े का प्रतीक चिन्ह लगाए जाने चाहिए। इससे न केवल बेहतर कैरियर की ही प्राप्ति होती है बल्कि व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है।
3--अगर आप विदेश में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं तो अपने कमरे में स्टडी टेबल पर एक ग्लोब रखें।
4--दक्षिण दिशा(South) की दिवार(wall) पर विश्व मानचित्र (world map)लटकाएं।
5--उत्तर दिशा (north) में एक सुन्दर सा छोटा वाटर फाउंटेन रखें। इसे रोज सुबह शाम जरूर चलाएं।
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क्या आप भी किसी कारण से परेशान है??--
क्या आप भी किसी कारण से परेशान है??--
आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें ! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय ! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें ! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी ! जिसको कोई परेशानी नहीं है वो कृपया करके रविवार को न चढ़ाये। तिथिर्विष्णुस्तथा वारं नक्षत्रं विष्णुरेव च। योगश्च करणं विष्णु: र्सव विष्णुमयं जगत।’ इनमें में रविवार भगवान विष्णु को सर्वाधिक प्रिय है, इसलिए रविवार को विष्णु प्रिया तुलसी को नहीं तोड़ना चाहिए, ऐसा विधान बना। कई जगहों पर क्रूर वार होने के कारण मंगलवार को भी तुलसी नहीं तोड़ते। मुहूर्त लोक पर अधिक आधारित एवं प्रचलित होते हैं, इसलिए तुलसी तोड़ने के सन्दर्भ में भी लोक की प्रधानता प्रचलित हुई। सभी जगहों पर रविवार को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए, यह धारणा प्रचलित नहीं है। जैसे विष्णु प्रधान धाम श्रीबद्रीनाथ एवं जगन्नाथ में भगवान के पूजन एवं श्रृंगार में प्रतिदिन तुलसी का ही प्रयोग होता है। यहां पर प्रतिदिन तुलसी तोड़ी जाती है और भगवान का पूजन-श्रृंगार किया जाता है। हमारे शास्त्रों ने लोक के आधार पर आचरण की व्यवस्था बनाई है। शास्त्र से अधिक लोक को प्रधानता दी है।
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जब ज्यादा ही बुरा समय सताए तो ये करें उपाय सभी राशियों के लिए --
जब ज्यादा ही बुरा समय सताए तो ये करें उपाय सभी राशियों के लिए ---
मेष राशि
मेष राशि के जातक अपने घर के दक्षिण(south) भाग में गुड़ की एक डली छोड़कर ही कहीं भी बाहर जाएँ। साथ ही हनुमान जी के मंदिर जाकर पूजा करे । इससे कार्यों में सफलता मिलेगी। अत: किसी भी महत्वपूर्ण काम के लिए घर से जाते समय यह उपाय अवश्य करें।
वृष राशि
वृष राशि के जातक प्रतिदिन किसी सफेद गाय को कच्चे चावल खिलाएं धन की प्रप्ति होंगी।यह उपाय शुक्रवार से आरम्भ करना चाहिए। चावल की मात्रा रोज़ एक ही रखे। इस उपाय से आपके लिए धन लाभ की स्थितियाँ बनेगी ।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातक बुधवार के दिन खड़े हरे मूंग का किसी भी ज़रूरतमन्द को दान करें।नियमित रूप से सफेद गाय को हरी घास खिलाने, किसी सुहागन स्त्री को सुहाग के सामान का दान देने से भी धन लाभ के साथ साथ घर-परिवार के दोष भी दूर होते है।आप घर की पश्चिम-उत्तर (North west)दिशा में पैसा रखें इससे भी धन लाभ होगा ।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातक अपने घर के पश्चिम(west) भाग में नियमित रूप से कबूतरों को ज्वार के दाने चुगाने को डालें इससे घर का पश्चिमी भाग लाभप्रद्द हो जाता है। इससे धन लाभ तो होगा ही परिवार में शांति भी बनी रहगी।
सिंह राशि
सिंह राशि के जातक नियमपूर्वक तांबे के लोटे में जल भरकर उससे अपने घर के पूर्व(east) भाग को उस जल से छिड़ककर गीला करें। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी एवं शुभ समाचार प्राप्त होंगे। घर में ईश्वरीय कृपा बनी रहेगी।
कन्या राशी
कन्या राशि के जातक नियमित रूप से अपने घर की उत्तर दिशा(north) में हरी घास को गायों को खिलाएं । माह में एक बार किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को खड़ा मूंग और गुड़ का दान करें। इससे घर में लक्ष्मी का वास होगा साथ ही रुका धन भी प्राप्त होगा।
तुला राशि
तुला राशि के जातक शुक्रवार को प्रात: घर के वायव कोण अर्थात पश्चिम-उत्तर(north west) दिशा में सफेद कपड़े में चावल बांधकर लटका दें। ऐसा करने से घर में हर्ष उल्लास का वातावरण आएगा सभी कार्यों में सफलता मिलेगी।यह चावल हर माह बदलते रहे पूराने चावल किसी नदी मेँ विसर्जित कर दें और नए चावल पुन: बांध कर लटका दें ।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातक अपने घर के आग्नेय कोण या दक्षिण-पूर्व (south east)कोने में जौ को लाल कपड़े में बांधकर रखें।इससे घर में शुभता का वास होगा, धन, यश और सफ़लता की प्रप्ति होंगी ।
धनु राशि
धनु राशि के जातक अपने घर के ईशान कोण(north east) मे पूजा घर बनायेँ। यहां पर भगवान विष्णु कि नित्य पूजा एवं सहस्त्र नाम का पाठ करें। ऐसा करने से कार्यों में प्रगति होगी, रोग और दोष घर से दूर रहेंगे ।
मकर राशि
मकर राशि के जातक अपने घर के पश्चिम(west) में तुलसी का पौधा लगाकर उसे निरंतर सींचें। ऐसा करने से घर में मांगलिक कार्य के साथ आर्थिक लाभ के भी योग बनेंगे। सभी बिगड़े काम आसानी से बनने लगेंगे ।
कुम्भ राशि
कुम्भ राशि के जातक घर की पश्चिम-उत्तर दिशा / वायव कोण (north west)को स्वच्छ रखें। आप यदि अपने उपयोगी कागजात इस स्थान पर रखेंगे तो कार्यों में निश्चित सफलता मिलेगी। इस स्थान में किसी भी प्रकार का स्टोर ना बनवाएं। आप अपने घर में मनी प्लांट भी अवश्य ही लगाएं।
मीन राशि
मीन राशि के जातक घर की पूर्वोत्तर दिशा(east) में मंदिर बनवाएं।लेकिन ध्यान रहे कि घर का मंदिर और रसोईघर साथ-साथ न हो ।घर में भगवान लक्ष्मीनारायण/विष्णु भगवान की उपासना करें। हर बृहस्पति वार को प्रभु को पीली मिठाई का भोग लगाएँ।इससे आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं रहेगी ।
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कोई काम न बन रहा हो....
कोई काम न बन रहा हो
कोई काम न बन रहा हो तो 19 शनिवार तक आप पीपल के पेड़ में अपनी लम्बाई के बराबर का धागा लपेटें और तिल के तेल का ही दीया जलाएं। इस दीये में 11 दानें काले उड़द जरूर रखें। और निम्न मन्त्र का जप करें जब तक की धागा ख़त्म न हो जाये।
"""ऊँ शं शनैश्चराय नमः।"""
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