सप्तमुखी रूद्राक्ष
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कौन धारण करें- वे जातक जिनको पग-पग पर बाधाओं का सामनाकरना पड़ता हो, दरिद्रता जिनका साथ नहीं छोड़ती हो अथवा जिनको भूमि-भवन सम्बन्धी परेशानी हो या जिन पर आरोप-प्रत्यारोप लगते हों एवं उनकी नौकरी में किसी प्रकार का आरोप लगकर मुकदमा चल रहा हो अथवा व्यापार में घाटा हो अथवा जिनको अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से कोई परेशानी हो तो सप्तमुखी रुद्राक्ष धारण करने से उनकी समस्यायें कम हो सकती हैं अथवा उनसे छुटकारा भी मिल सकता है। मेरा ऐसा अनुभव है कि जिनको शनि की अशुभ दशा या साढ़ेसाती चल रही हो और वे कष्ट पा रहे हों तो वे जातक भी यदि सप्तमुखी रुद्राक्ष धारण करें तो उनको अत्यंत शुभफल प्राप्त होते हैं। उन पर शनिदेव प्रसन्न होते हैं और अपने अशुभ परिणामों एवं कुफलों पर रोक लगा कर शुभफल प्रदान करते हैं।
रोगनिवृत्ति- ऐसे जातक जिनको स्नायु विकार हो अथवा नस-नाड़ियों साम्बन्धी विकार हो, शरीर में अंदरूनी चोट लगकर नील पड़ती हो अथवा, जोड़ों या घुटनों में दर्द होता हो या वायुविकार से परेशान हों अथवा अवसाद एवं अति आत्मा केन्द्रित रहते हों, उनको सप्तमुखी रुद्राय, विधिवत् धारण करने से निश्चय उक्त रोग-पीड़ा से मुक्ति मिल सकती है।
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