अंक बोलते हैं (November)

 नवम्बर (November)
21 अक्तूबर से वृश्चिक राशि प्रारम्भ हो जाती है, लेकिन सात दिन तक पूर्व राशि तुला के साथ इसका संधि-काल चलता है, अतः 28 अक्तूबर तक यह पूर्ण प्रभाव में नहीं आ पाती। उसके बाद 20 नवम्बर तक इसका पूर्ण प्रभाव रहता है। फिर आगामी राशि धनु के साथ संधि-काल प्रारम्भ हो जाने के कारण सात दिन तक इसके प्रभाव में उत्तरोत्तर कमी होती जाती है। वृश्चिक जल-त्रिकोण की दूसरी राशि है और इसका स्वामी मंगल (सौम्य) है। इस अवधि अर्थात् 21 अक्तूबर से 20-28 नवम्बर तक जन्मे व्यक्ति या तो बहुत अच्छे होते हैं या बहुत बुरे। लगभग इक्कीस वर्ष की आयु तक वे अत्यंत पवित्र हृदय और धर्मात्मा होते हैं। लेकिन यदि उनकी काम-भावना जाग उठे तो प्रायः वे इसकी उलटी दिशा में मुड़ जाते हैं। फिर भी, कुछ अत्यंत उदात्त मनुष्य इस राशि में पैदा हुए हैं। लेकिन सभी अत्यंत भावुक होते हैं जो उनकी प्रकृति के सभी रूपों की विशेषता है। इस अवधि में पैदा हुए लोगों में असाधारण आकर्षण-शक्ति होती है। वे उत्तम डॉक्टर, सर्जन, कष्टहर्ता, उपदेशक और वक्ता बनते हैं। सार्वजनिक जीवन में श्रोताओं पर उनका
भारी प्रभाव पड़ता है जिन्हें वे अपनी इच्छानुसार किसी दिशा में मोड़ सकते हैं। उनका भाषा पर अधिकार होता है, बोलने और लिखने दोनों में, और अपनी वर्णन-शैली में अत्यंत नाटकीय होते हैं। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि जिसके सम्पर्क में आते हैं, उसी जैसे बन जाते हैं। फलस्वरूप उन्हें प्रायः दूसरों के दोषों के लिए भुगतना होता है। यदि वे इस राशि के उच्च धरातल वाले हों तो मानवीय, अत्यंत उदार और आत्म-त्यागी होते हैं। संकट काल और आपात स्थिति में शांत और दृढ़-संकल्पी रहते हैं तथा उन पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। व्यापार, राजनीति, साहित्य या जिस ओर भी दिमाग लगाएँ,
विचारों में अत्यंत भौतिक होते हैं तथा आम तौर से सफल रहते हैं। वे भाग्य की विचित्र प्रतिकूलता के भी शिकार होते हैं। प्रायः गलत अफवाहें और कहानियाँ फैलाकर उन्हें बदनाम किया जाता है। जीवन-संघर्ष में वे बहुत कुछ ‘भाग्य की संतान' होते हैं। शरीर के बजाय वे मन से अधिक लड़ने वाले होते हैं। यदि युद्ध के लिए विवश हो ही जाएँ तो अच्छे संगठनकर्ता बनते हैं, लेकिन आम तौर से वे रक्तपात से घृणा करते हैं। कूटनीतिज्ञ या वार्ताकार के रूप में वे उत्तम कार्य करते हैं। दूसरे लोगों के झगड़े निपटाने या शत्रुओं को एक स्थान पर लाने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वे बिच्छू की तरह डंक भी मार सकते हैं लेकिन थोड़ा-सा भी दुःख प्रकट कर देने पर आम तौर से उनका क्रोध उतर जाता है और वे तत्काल अपने शत्रुओं को क्षमा कर देते हैं। लेकिन अच्छे गुणों की प्रधानता हो या बुरे गुणों की, उनमें दुहरा जीवन जीने की प्रवृत्ति होती है-एक दुनियां को दिखाने के लिए, दूसरा अपने लिए। निचले या अधिक भौतिक धरातल पर यह प्रवृत्ति अधिक विकसित होती है। ऐसी दशा में वे एक सुखी पारिवारिक जीवन बिताते भी
देखे गए हैं और एक दूसरी गृहस्थी को भी पालते पाए गए हैं। उच्च धरातल पर यह प्रवृत्ति मानसिक जीवन को अधिक प्रभावित करती है। आम तौर से वे दो धंधे अपनाते हैं और दोनों में सफल होते हैं।
देर-सवेर, वे गुप्त विद्याओं में दिलचस्पी लेने लगते हैं। वे शीघ्र अन्तर्ज्ञान की शक्ति पा लेते हैं। और प्रायः लेखक, चित्रकार, कवि या संगीतज्ञ के रूप में नाम कमाते हैं। वे स्वाभाविक, दार्शनिक और प्रकृति के अध्येता होते हैं। दूसरों के चरित्र को बहुत अच्छी तरह से देख पढ़ सकते हैं। जो उन्हें मानते हैं, वे आम तौर से प्यार और सराहना करते हैं। लेकिन शायद ही कुछ कभी-न-कभी बदनामी या घोटालों के शिकार होने से बच पाते हों। स अवधि में पैदा हुए व्यक्तियों की आय के आमतौर से दो साधन होते हैं। प्रारम्भिक वर्षों में उन्हें काफी परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना होता है। प्रायः एकांतवास
भी करना होता है। लेकिन ऐसी परीक्षाओं में उनकी इच्छा शक्ति और महत्त्वाकांक्षा बढ़ती ही है तथा देर-सवेर सफलता और यश मिलते हैं। जिस धंधे या व्यवसाय में लगे होते हैं, उसी में कठोर परिश्रम करते हैं। कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। उनकी इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें काम करते रहने को प्रेरित करते रहते हैं। उनकी खोज की अच्छी योग्यता होती है और अपने काम में उपाय-कुशल होते हैं।
वे अच्छे सरकारी कर्मचारी बनते हैं। विशेषकर उन्हें कूटनीतिक स्थितियों से निपटने और गुप्त मिशन पूरे करने का वरदान मिला होता है। वे प्रायः सफल जासूस और अपराधों का पता लगाने वाले पुलिस अधिकारी बनते हैं। वे अच्छे वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री या जाँच पड़ताली बनते हैं, विशेषकर द्रवों के लिए। उनमें अक्सर खतरनाक उद्यमों में लगने की प्रवृत्ति रहती है, जैसे गुप्त खजाने, छिपी खानों
की खोज, रहस्यपूर्ण तथा जान-जोखिम के अन्य काम। उच्च धरातल वाले गुप्त विद्याओं तथा मनोविश्लेषण में गहरी दिलचस्पी लेते हैं। निचले स्तर वाले गुंडों और गुप्त संस्थाओं से सम्बन्ध जोड़ना चाहते हैं। उच्च स्तर वाले प्रायः उच्च कुल में विवाह करते हैं। उन्हें विवाह से लाभ होता है। यदि नहीं होता तो भी कम-से-कम  ऐसा जीवन साथी चुनते हैं जो उच्च बौद्धिक स्तर वाला होता है अथवा नाम कमा चुका होता है।
स्वास्थ्य
वृश्चिक में जन्मे लोग बचपन में प्रायः नाजुक होते हैं और औसत से अधिक बाल-रोगों के शिकार होते हैं। उनकी बीमारियाँ आम तौर से बड़ी आंतों और मलमूत्र मार्ग से सम्बन्धित होती हैं। वे भगन्दर, पित्ताशय में सूजन, कामांगों के संकट और ग्रंथियों की परेशानी से पीड़ित हो सकते हैं। जीवन में वे शायद ही किसी दुर्घटना से या हाथों में स्थायी चोट से बच पाते हों। फेंफड़ों के ऊपरी भाग और श्वास नलिका कमजोर होते हैं। वृश्चिक में जन्मे सभी लोग अपने इक्कीसवें वर्ष के बाद बीमारी से असाधारण प्रतिरोध का परिचय देते हैं।
आर्थिक दशा
इन लोगों को भाग्य के असाधारण उतार-चढ़ाव का अनुभव करना पड़ता है। उनमें दूसरों पर अधिक भरोसा करने और अधिक आशावादी होने की प्रवृत्ति होती है। वे आसानी से ऐसी योजनाओं में फंस जाते हैं जिनका ठोस आधार नहीं होता। वे अति उदार और फिजूल खर्च भी होते हैं। सहायता की पुकार होने पर, विशेषकर विपरीत लिंगी से वे अपने आपको रोक नहीं पाते। पैसा उनकी जेब में काटता है। अपनी मनसिक योग्यताओं से वे पैसा कमा तो सकते हैं लेकिन शायद ही जोड़कर रख पाते हैं। परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर वे खूब यात्राएँ करते हैं और नई परिस्थितियों और वातावरण के अनुकूल शीघ्र अपने को ढाल लेते हैं।
विवाह, सम्बन्ध, साझेदारियाँ आदि
इन लोगों के सबसे अधिक सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध अपनी निजी राशि वृश्चिक (29 अक्तूबर (21 जून से 20 जुलाई), इनके पीछे के संधिकाल में जन्मे व्यक्तियों के साथ रहेंगे। वे अपनी राशि से सातवीं वृष (21 अप्रैल से 20-27 मई) के दौरान जन्मे लोगों से भी काफी प्रभावित से 20 नवम्बर), जल-त्रिकोण की अन्य राशियों मीन (19 फरवरी से 20 मार्च) तथा कर्क होते हैं। नवम्बर (November)
21 अक्तूबर से वृश्चिक राशि प्रारम्भ हो जाती है, लेकिन सात दिन तक पूर्व राशि तुला के साथ इसका संधि-काल चलता है, अतः 28 अक्तूबर तक यह पूर्ण प्रभाव में नहीं आ पाती। उसके बाद 20 नवम्बर तक इसका पूर्ण प्रभाव रहता है। फिर आगामी राशि धनु के साथ संधि-काल प्रारम्भ हो जाने के कारण सात दिन तक इसके प्रभाव में उत्तरोत्तर कमी होती जाती है। वृश्चिक जल-त्रिकोण की दूसरी राशि है और इसका स्वामी मंगल (सौम्य) है। इस अवधि अर्थात् 21 अक्तूबर से 20-28 नवम्बर तक जन्मे व्यक्ति या तो बहुत अच्छे होते हैं या बहुत बुरे। लगभग इक्कीस वर्ष की आयु तक वे अत्यंत पवित्र हृदय और धर्मात्मा होते हैं। लेकिन यदि उनकी काम-भावना जाग उठे तो प्रायः वे इसकी उलटी दिशा में मुड़ जाते हैं। फिर भी, कुछ अत्यंत उदात्त मनुष्य इस राशि में पैदा हुए हैं। लेकिन सभी अत्यंत भावुक होते हैं जो उनकी प्रकृति के सभी रूपों की विशेषता है। इस अवधि में पैदा हुए लोगों में असाधारण आकर्षण-शक्ति होती है। वे उत्तम डॉक्टर, सर्जन, कष्टहर्ता, उपदेशक और वक्ता बनते हैं। सार्वजनिक जीवन में श्रोताओं पर उनका
भारी प्रभाव पड़ता है जिन्हें वे अपनी इच्छानुसार किसी दिशा में मोड़ सकते हैं। उनका भाषा पर अधिकार होता है, बोलने और लिखने दोनों में, और अपनी वर्णन-शैली में अत्यंत नाटकीय होते हैं। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि जिसके सम्पर्क में आते हैं, उसी जैसे बन जाते हैं। फलस्वरूप उन्हें प्रायः दूसरों के दोषों के लिए भुगतना होता है। यदि वे इस राशि के उच्च धरातल वाले हों तो मानवीय, अत्यंत उदार और आत्म-त्यागी होते हैं। संकट काल और आपात स्थिति में शांत और दृढ़-संकल्पी रहते हैं तथा उन पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। व्यापार, राजनीति, साहित्य या जिस ओर भी दिमाग लगाएँ,
विचारों में अत्यंत भौतिक होते हैं तथा आम तौर से सफल रहते हैं। वे भाग्य की विचित्र प्रतिकूलता के भी शिकार होते हैं। प्रायः गलत अफवाहें और कहानियाँ फैलाकर उन्हें बदनाम किया जाता है। जीवन-संघर्ष में वे बहुत कुछ ‘भाग्य की संतान' होते हैं। शरीर के बजाय वे मन से अधिक लड़ने वाले होते हैं। यदि युद्ध के लिए विवश हो ही जाएँ तो अच्छे संगठनकर्ता बनते हैं, लेकिन आम तौर से वे रक्तपात से घृणा करते हैं। कूटनीतिज्ञ या वार्ताकार के रूप में वे उत्तम कार्य करते हैं। दूसरे लोगों के झगड़े निपटाने या शत्रुओं को एक स्थान पर लाने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वे बिच्छू की तरह डंक भी मार सकते हैं लेकिन थोड़ा-सा भी दुःख प्रकट कर देने पर आम तौर से उनका क्रोध उतर जाता है और वे तत्काल अपने शत्रुओं को क्षमा कर देते हैं। लेकिन अच्छे गुणों की प्रधानता हो या बुरे गुणों की, उनमें दुहरा जीवन जीने की प्रवृत्ति होती है-एक दुनियां को दिखाने के लिए, दूसरा अपने लिए। निचले या अधिक भौतिक धरातल पर यह प्रवृत्ति अधिक विकसित होती है। ऐसी दशा में वे एक सुखी पारिवारिक जीवन बिताते भी
देखे गए हैं और एक दूसरी गृहस्थी को भी पालते पाए गए हैं। उच्च धरातल पर यह प्रवृत्ति मानसिक जीवन को अधिक प्रभावित करती है। आम तौर से वे दो धंधे अपनाते हैं और दोनों में सफल होते हैं।
देर-सवेर, वे गुप्त विद्याओं में दिलचस्पी लेने लगते हैं। वे शीघ्र अन्तर्ज्ञान की शक्ति पा लेते हैं। और प्रायः लेखक, चित्रकार, कवि या संगीतज्ञ के रूप में नाम कमाते हैं। वे स्वाभाविक, दार्शनिक और प्रकृति के अध्येता होते हैं। दूसरों के चरित्र को बहुत अच्छी तरह से देख पढ़ सकते हैं। जो उन्हें मानते हैं, वे आम तौर से प्यार और सराहना करते हैं। लेकिन शायद ही कुछ कभी-न-कभी बदनामी या घोटालों के शिकार होने से बच पाते हों। स अवधि में पैदा हुए व्यक्तियों की आय के आमतौर से दो साधन होते हैं। प्रारम्भिक वर्षों में उन्हें काफी परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना होता है। प्रायः एकांतवास
भी करना होता है। लेकिन ऐसी परीक्षाओं में उनकी इच्छा शक्ति और महत्त्वाकांक्षा बढ़ती ही है तथा देर-सवेर सफलता और यश मिलते हैं। जिस धंधे या व्यवसाय में लगे होते हैं, उसी में कठोर परिश्रम करते हैं। कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। उनकी इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें काम करते रहने को प्रेरित करते रहते हैं। उनकी खोज की अच्छी योग्यता होती है और अपने काम में उपाय-कुशल होते हैं।
वे अच्छे सरकारी कर्मचारी बनते हैं। विशेषकर उन्हें कूटनीतिक स्थितियों से निपटने और गुप्त मिशन पूरे करने का वरदान मिला होता है। वे प्रायः सफल जासूस और अपराधों का पता लगाने वाले पुलिस अधिकारी बनते हैं। वे अच्छे वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री या जाँच पड़ताली बनते हैं, विशेषकर द्रवों के लिए। उनमें अक्सर खतरनाक उद्यमों में लगने की प्रवृत्ति रहती है, जैसे गुप्त खजाने, छिपी खानों
की खोज, रहस्यपूर्ण तथा जान-जोखिम के अन्य काम। उच्च धरातल वाले गुप्त विद्याओं तथा मनोविश्लेषण में गहरी दिलचस्पी लेते हैं। निचले स्तर वाले गुंडों और गुप्त संस्थाओं से सम्बन्ध जोड़ना चाहते हैं। उच्च स्तर वाले प्रायः उच्च कुल में विवाह करते हैं। उन्हें विवाह से लाभ होता है। यदि नहीं होता तो भी कम-से-कम  ऐसा जीवन साथी चुनते हैं जो उच्च बौद्धिक स्तर वाला होता है अथवा नाम कमा चुका होता है।
स्वास्थ्य
वृश्चिक में जन्मे लोग बचपन में प्रायः नाजुक होते हैं और औसत से अधिक बाल-रोगों के शिकार होते हैं। उनकी बीमारियाँ आम तौर से बड़ी आंतों और मलमूत्र मार्ग से सम्बन्धित होती हैं। वे भगन्दर, पित्ताशय में सूजन, कामांगों के संकट और ग्रंथियों की परेशानी से पीड़ित हो सकते हैं। जीवन में वे शायद ही किसी दुर्घटना से या हाथों में स्थायी चोट से बच पाते हों। फेंफड़ों के ऊपरी भाग और श्वास नलिका कमजोर होते हैं। वृश्चिक में जन्मे सभी लोग अपने इक्कीसवें वर्ष के बाद बीमारी से असाधारण प्रतिरोध का परिचय देते हैं।
आर्थिक दशा
इन लोगों को भाग्य के असाधारण उतार-चढ़ाव का अनुभव करना पड़ता है। उनमें दूसरों पर अधिक भरोसा करने और अधिक आशावादी होने की प्रवृत्ति होती है। वे आसानी से ऐसी योजनाओं में फंस जाते हैं जिनका ठोस आधार नहीं होता। वे अति उदार और फिजूल खर्च भी होते हैं। सहायता की पुकार होने पर, विशेषकर विपरीत लिंगी से वे अपने आपको रोक नहीं पाते। पैसा उनकी जेब में काटता है। अपनी मनसिक योग्यताओं से वे पैसा कमा तो सकते हैं लेकिन शायद ही जोड़कर रख पाते हैं। परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर वे खूब यात्राएँ करते हैं और नई परिस्थितियों और वातावरण के अनुकूल शीघ्र अपने को ढाल लेते हैं।
विवाह, सम्बन्ध, साझेदारियाँ आदि
इन लोगों के सबसे अधिक सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध अपनी निजी राशि वृश्चिक (29 अक्तूबर (21 जून से 20 जुलाई), इनके पीछे के संधिकाल में जन्मे व्यक्तियों के साथ रहेंगे। वे अपनी राशि से सातवीं वृष (21 अप्रैल से 20-27 मई) के दौरान जन्मे लोगों से भी काफी प्रभावित से 20 नवम्बर), जल-त्रिकोण की अन्य राशियों मीन (19 फरवरी से 20 मार्च) तथा कर्क होते हैं। नवम्बर (November)
21 अक्तूबर से वृश्चिक राशि प्रारम्भ हो जाती है, लेकिन सात दिन तक पूर्व राशि तुला के साथ इसका संधि-काल चलता है, अतः 28 अक्तूबर तक यह पूर्ण प्रभाव में नहीं आ पाती। उसके बाद 20 नवम्बर तक इसका पूर्ण प्रभाव रहता है। फिर आगामी राशि धनु के साथ संधि-काल प्रारम्भ हो जाने के कारण सात दिन तक इसके प्रभाव में उत्तरोत्तर कमी होती जाती है। वृश्चिक जल-त्रिकोण की दूसरी राशि है और इसका स्वामी मंगल (सौम्य) है। इस अवधि अर्थात् 21 अक्तूबर से 20-28 नवम्बर तक जन्मे व्यक्ति या तो बहुत अच्छे होते हैं या बहुत बुरे। लगभग इक्कीस वर्ष की आयु तक वे अत्यंत पवित्र हृदय और धर्मात्मा होते हैं। लेकिन यदि उनकी काम-भावना जाग उठे तो प्रायः वे इसकी उलटी दिशा में मुड़ जाते हैं। फिर भी, कुछ अत्यंत उदात्त मनुष्य इस राशि में पैदा हुए हैं। लेकिन सभी अत्यंत भावुक होते हैं जो उनकी प्रकृति के सभी रूपों की विशेषता है। इस अवधि में पैदा हुए लोगों में असाधारण आकर्षण-शक्ति होती है। वे उत्तम डॉक्टर, सर्जन, कष्टहर्ता, उपदेशक और वक्ता बनते हैं। सार्वजनिक जीवन में श्रोताओं पर उनका
भारी प्रभाव पड़ता है जिन्हें वे अपनी इच्छानुसार किसी दिशा में मोड़ सकते हैं। उनका भाषा पर अधिकार होता है, बोलने और लिखने दोनों में, और अपनी वर्णन-शैली में अत्यंत नाटकीय होते हैं। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि जिसके सम्पर्क में आते हैं, उसी जैसे बन जाते हैं। फलस्वरूप उन्हें प्रायः दूसरों के दोषों के लिए भुगतना होता है। यदि वे इस राशि के उच्च धरातल वाले हों तो मानवीय, अत्यंत उदार और आत्म-त्यागी होते हैं। संकट काल और आपात स्थिति में शांत और दृढ़-संकल्पी रहते हैं तथा उन पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। व्यापार, राजनीति, साहित्य या जिस ओर भी दिमाग लगाएँ,
विचारों में अत्यंत भौतिक होते हैं तथा आम तौर से सफल रहते हैं। वे भाग्य की विचित्र प्रतिकूलता के भी शिकार होते हैं। प्रायः गलत अफवाहें और कहानियाँ फैलाकर उन्हें बदनाम किया जाता है। जीवन-संघर्ष में वे बहुत कुछ ‘भाग्य की संतान' होते हैं। शरीर के बजाय वे मन से अधिक लड़ने वाले होते हैं। यदि युद्ध के लिए विवश हो ही जाएँ तो अच्छे संगठनकर्ता बनते हैं, लेकिन आम तौर से वे रक्तपात से घृणा करते हैं। कूटनीतिज्ञ या वार्ताकार के रूप में वे उत्तम कार्य करते हैं। दूसरे लोगों के झगड़े निपटाने या शत्रुओं को एक स्थान पर लाने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वे बिच्छू की तरह डंक भी मार सकते हैं लेकिन थोड़ा-सा भी दुःख प्रकट कर देने पर आम तौर से उनका क्रोध उतर जाता है और वे तत्काल अपने शत्रुओं को क्षमा कर देते हैं। लेकिन अच्छे गुणों की प्रधानता हो या बुरे गुणों की, उनमें दुहरा जीवन जीने की प्रवृत्ति होती है-एक दुनियां को दिखाने के लिए, दूसरा अपने लिए। निचले या अधिक भौतिक धरातल पर यह प्रवृत्ति अधिक विकसित होती है। ऐसी दशा में वे एक सुखी पारिवारिक जीवन बिताते भी
देखे गए हैं और एक दूसरी गृहस्थी को भी पालते पाए गए हैं। उच्च धरातल पर यह प्रवृत्ति मानसिक जीवन को अधिक प्रभावित करती है। आम तौर से वे दो धंधे अपनाते हैं और दोनों में सफल होते हैं।
देर-सवेर, वे गुप्त विद्याओं में दिलचस्पी लेने लगते हैं। वे शीघ्र अन्तर्ज्ञान की शक्ति पा लेते हैं। और प्रायः लेखक, चित्रकार, कवि या संगीतज्ञ के रूप में नाम कमाते हैं। वे स्वाभाविक, दार्शनिक और प्रकृति के अध्येता होते हैं। दूसरों के चरित्र को बहुत अच्छी तरह से देख पढ़ सकते हैं। जो उन्हें मानते हैं, वे आम तौर से प्यार और सराहना करते हैं। लेकिन शायद ही कुछ कभी-न-कभी बदनामी या घोटालों के शिकार होने से बच पाते हों। स अवधि में पैदा हुए व्यक्तियों की आय के आमतौर से दो साधन होते हैं। प्रारम्भिक वर्षों में उन्हें काफी परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना होता है। प्रायः एकांतवास
भी करना होता है। लेकिन ऐसी परीक्षाओं में उनकी इच्छा शक्ति और महत्त्वाकांक्षा बढ़ती ही है तथा देर-सवेर सफलता और यश मिलते हैं। जिस धंधे या व्यवसाय में लगे होते हैं, उसी में कठोर परिश्रम करते हैं। कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। उनकी इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें काम करते रहने को प्रेरित करते रहते हैं। उनकी खोज की अच्छी योग्यता होती है और अपने काम में उपाय-कुशल होते हैं।
वे अच्छे सरकारी कर्मचारी बनते हैं। विशेषकर उन्हें कूटनीतिक स्थितियों से निपटने और गुप्त मिशन पूरे करने का वरदान मिला होता है। वे प्रायः सफल जासूस और अपराधों का पता लगाने वाले पुलिस अधिकारी बनते हैं। वे अच्छे वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री या जाँच पड़ताली बनते हैं, विशेषकर द्रवों के लिए। उनमें अक्सर खतरनाक उद्यमों में लगने की प्रवृत्ति रहती है, जैसे गुप्त खजाने, छिपी खानों
की खोज, रहस्यपूर्ण तथा जान-जोखिम के अन्य काम। उच्च धरातल वाले गुप्त विद्याओं तथा मनोविश्लेषण में गहरी दिलचस्पी लेते हैं। निचले स्तर वाले गुंडों और गुप्त संस्थाओं से सम्बन्ध जोड़ना चाहते हैं। उच्च स्तर वाले प्रायः उच्च कुल में विवाह करते हैं। उन्हें विवाह से लाभ होता है। यदि नहीं होता तो भी कम-से-कम  ऐसा जीवन साथी चुनते हैं जो उच्च बौद्धिक स्तर वाला होता है अथवा नाम कमा चुका होता है।
स्वास्थ्य
वृश्चिक में जन्मे लोग बचपन में प्रायः नाजुक होते हैं और औसत से अधिक बाल-रोगों के शिकार होते हैं। उनकी बीमारियाँ आम तौर से बड़ी आंतों और मलमूत्र मार्ग से सम्बन्धित होती हैं। वे भगन्दर, पित्ताशय में सूजन, कामांगों के संकट और ग्रंथियों की परेशानी से पीड़ित हो सकते हैं। जीवन में वे शायद ही किसी दुर्घटना से या हाथों में स्थायी चोट से बच पाते हों। फेंफड़ों के ऊपरी भाग और श्वास नलिका कमजोर होते हैं। वृश्चिक में जन्मे सभी लोग अपने इक्कीसवें वर्ष के बाद बीमारी से असाधारण प्रतिरोध का परिचय देते हैं।
आर्थिक दशा
इन लोगों को भाग्य के असाधारण उतार-चढ़ाव का अनुभव करना पड़ता है। उनमें दूसरों पर अधिक भरोसा करने और अधिक आशावादी होने की प्रवृत्ति होती है। वे आसानी से ऐसी योजनाओं में फंस जाते हैं जिनका ठोस आधार नहीं होता। वे अति उदार और फिजूल खर्च भी होते हैं। सहायता की पुकार होने पर, विशेषकर विपरीत लिंगी से वे अपने आपको रोक नहीं पाते। पैसा उनकी जेब में काटता है। अपनी मनसिक योग्यताओं से वे पैसा कमा तो सकते हैं लेकिन शायद ही जोड़कर रख पाते हैं। परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर वे खूब यात्राएँ करते हैं और नई परिस्थितियों और वातावरण के अनुकूल शीघ्र अपने को ढाल लेते हैं।
विवाह, सम्बन्ध, साझेदारियाँ आदि
इन लोगों के सबसे अधिक सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध अपनी निजी राशि वृश्चिक (29 अक्तूबर (21 जून से 20 जुलाई), इनके पीछे के संधिकाल में जन्मे व्यक्तियों के साथ रहेंगे। वे अपनी राशि से सातवीं वृष (21 अप्रैल से 20-27 मई) के दौरान जन्मे लोगों से भी काफी प्रभावित से 20 नवम्बर), जल-त्रिकोण की अन्य राशियों मीन (19 फरवरी से 20 मार्च) तथा कर्क होते हैं। नवम्बर (November)
21 अक्तूबर से वृश्चिक राशि प्रारम्भ हो जाती है, लेकिन सात दिन तक पूर्व राशि तुला के साथ इसका संधि-काल चलता है, अतः 28 अक्तूबर तक यह पूर्ण प्रभाव में नहीं आ पाती। उसके बाद 20 नवम्बर तक इसका पूर्ण प्रभाव रहता है। फिर आगामी राशि धनु के साथ संधि-काल प्रारम्भ हो जाने के कारण सात दिन तक इसके प्रभाव में उत्तरोत्तर कमी होती जाती है। वृश्चिक जल-त्रिकोण की दूसरी राशि है और इसका स्वामी मंगल (सौम्य) है। इस अवधि अर्थात् 21 अक्तूबर से 20-28 नवम्बर तक जन्मे व्यक्ति या तो बहुत अच्छे होते हैं या बहुत बुरे। लगभग इक्कीस वर्ष की आयु तक वे अत्यंत पवित्र हृदय और धर्मात्मा होते हैं। लेकिन यदि उनकी काम-भावना जाग उठे तो प्रायः वे इसकी उलटी दिशा में मुड़ जाते हैं। फिर भी, कुछ अत्यंत उदात्त मनुष्य इस राशि में पैदा हुए हैं। लेकिन सभी अत्यंत भावुक होते हैं जो उनकी प्रकृति के सभी रूपों की विशेषता है। इस अवधि में पैदा हुए लोगों में असाधारण आकर्षण-शक्ति होती है। वे उत्तम डॉक्टर, सर्जन, कष्टहर्ता, उपदेशक और वक्ता बनते हैं। सार्वजनिक जीवन में श्रोताओं पर उनका
भारी प्रभाव पड़ता है जिन्हें वे अपनी इच्छानुसार किसी दिशा में मोड़ सकते हैं। उनका भाषा पर अधिकार होता है, बोलने और लिखने दोनों में, और अपनी वर्णन-शैली में अत्यंत नाटकीय होते हैं। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि जिसके सम्पर्क में आते हैं, उसी जैसे बन जाते हैं। फलस्वरूप उन्हें प्रायः दूसरों के दोषों के लिए भुगतना होता है। यदि वे इस राशि के उच्च धरातल वाले हों तो मानवीय, अत्यंत उदार और आत्म-त्यागी होते हैं। संकट काल और आपात स्थिति में शांत और दृढ़-संकल्पी रहते हैं तथा उन पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। व्यापार, राजनीति, साहित्य या जिस ओर भी दिमाग लगाएँ,
विचारों में अत्यंत भौतिक होते हैं तथा आम तौर से सफल रहते हैं। वे भाग्य की विचित्र प्रतिकूलता के भी शिकार होते हैं। प्रायः गलत अफवाहें और कहानियाँ फैलाकर उन्हें बदनाम किया जाता है। जीवन-संघर्ष में वे बहुत कुछ ‘भाग्य की संतान' होते हैं। शरीर के बजाय वे मन से अधिक लड़ने वाले होते हैं। यदि युद्ध के लिए विवश हो ही जाएँ तो अच्छे संगठनकर्ता बनते हैं, लेकिन आम तौर से वे रक्तपात से घृणा करते हैं। कूटनीतिज्ञ या वार्ताकार के रूप में वे उत्तम कार्य करते हैं। दूसरे लोगों के झगड़े निपटाने या शत्रुओं को एक स्थान पर लाने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वे बिच्छू की तरह डंक भी मार सकते हैं लेकिन थोड़ा-सा भी दुःख प्रकट कर देने पर आम तौर से उनका क्रोध उतर जाता है और वे तत्काल अपने शत्रुओं को क्षमा कर देते हैं। लेकिन अच्छे गुणों की प्रधानता हो या बुरे गुणों की, उनमें दुहरा जीवन जीने की प्रवृत्ति होती है-एक दुनियां को दिखाने के लिए, दूसरा अपने लिए। निचले या अधिक भौतिक धरातल पर यह प्रवृत्ति अधिक विकसित होती है। ऐसी दशा में वे एक सुखी पारिवारिक जीवन बिताते भी
देखे गए हैं और एक दूसरी गृहस्थी को भी पालते पाए गए हैं। उच्च धरातल पर यह प्रवृत्ति मानसिक जीवन को अधिक प्रभावित करती है। आम तौर से वे दो धंधे अपनाते हैं और दोनों में सफल होते हैं।
देर-सवेर, वे गुप्त विद्याओं में दिलचस्पी लेने लगते हैं। वे शीघ्र अन्तर्ज्ञान की शक्ति पा लेते हैं। और प्रायः लेखक, चित्रकार, कवि या संगीतज्ञ के रूप में नाम कमाते हैं। वे स्वाभाविक, दार्शनिक और प्रकृति के अध्येता होते हैं। दूसरों के चरित्र को बहुत अच्छी तरह से देख पढ़ सकते हैं। जो उन्हें मानते हैं, वे आम तौर से प्यार और सराहना करते हैं। लेकिन शायद ही कुछ कभी-न-कभी बदनामी या घोटालों के शिकार होने से बच पाते हों। स अवधि में पैदा हुए व्यक्तियों की आय के आमतौर से दो साधन होते हैं। प्रारम्भिक वर्षों में उन्हें काफी परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना होता है। प्रायः एकांतवास
भी करना होता है। लेकिन ऐसी परीक्षाओं में उनकी इच्छा शक्ति और महत्त्वाकांक्षा बढ़ती ही है तथा देर-सवेर सफलता और यश मिलते हैं। जिस धंधे या व्यवसाय में लगे होते हैं, उसी में कठोर परिश्रम करते हैं। कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। उनकी इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें काम करते रहने को प्रेरित करते रहते हैं। उनकी खोज की अच्छी योग्यता होती है और अपने काम में उपाय-कुशल होते हैं।
वे अच्छे सरकारी कर्मचारी बनते हैं। विशेषकर उन्हें कूटनीतिक स्थितियों से निपटने और गुप्त मिशन पूरे करने का वरदान मिला होता है। वे प्रायः सफल जासूस और अपराधों का पता लगाने वाले पुलिस अधिकारी बनते हैं। वे अच्छे वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री या जाँच पड़ताली बनते हैं, विशेषकर द्रवों के लिए। उनमें अक्सर खतरनाक उद्यमों में लगने की प्रवृत्ति रहती है, जैसे गुप्त खजाने, छिपी खानों
की खोज, रहस्यपूर्ण तथा जान-जोखिम के अन्य काम। उच्च धरातल वाले गुप्त विद्याओं तथा मनोविश्लेषण में गहरी दिलचस्पी लेते हैं। निचले स्तर वाले गुंडों और गुप्त संस्थाओं से सम्बन्ध जोड़ना चाहते हैं। उच्च स्तर वाले प्रायः उच्च कुल में विवाह करते हैं। उन्हें विवाह से लाभ होता है। यदि नहीं होता तो भी कम-से-कम  ऐसा जीवन साथी चुनते हैं जो उच्च बौद्धिक स्तर वाला होता है अथवा नाम कमा चुका होता है।
स्वास्थ्य
वृश्चिक में जन्मे लोग बचपन में प्रायः नाजुक होते हैं और औसत से अधिक बाल-रोगों के शिकार होते हैं। उनकी बीमारियाँ आम तौर से बड़ी आंतों और मलमूत्र मार्ग से सम्बन्धित होती हैं। वे भगन्दर, पित्ताशय में सूजन, कामांगों के संकट और ग्रंथियों की परेशानी से पीड़ित हो सकते हैं। जीवन में वे शायद ही किसी दुर्घटना से या हाथों में स्थायी चोट से बच पाते हों। फेंफड़ों के ऊपरी भाग और श्वास नलिका कमजोर होते हैं। वृश्चिक में जन्मे सभी लोग अपने इक्कीसवें वर्ष के बाद बीमारी से असाधारण प्रतिरोध का परिचय देते हैं।
आर्थिक दशा
इन लोगों को भाग्य के असाधारण उतार-चढ़ाव का अनुभव करना पड़ता है। उनमें दूसरों पर अधिक भरोसा करने और अधिक आशावादी होने की प्रवृत्ति होती है। वे आसानी से ऐसी योजनाओं में फंस जाते हैं जिनका ठोस आधार नहीं होता। वे अति उदार और फिजूल खर्च भी होते हैं। सहायता की पुकार होने पर, विशेषकर विपरीत लिंगी से वे अपने आपको रोक नहीं पाते। पैसा उनकी जेब में काटता है। अपनी मनसिक योग्यताओं से वे पैसा कमा तो सकते हैं लेकिन शायद ही जोड़कर रख पाते हैं। परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर वे खूब यात्राएँ करते हैं और नई परिस्थितियों और वातावरण के अनुकूल शीघ्र अपने को ढाल लेते हैं।
विवाह, सम्बन्ध, साझेदारियाँ आदि
इन लोगों के सबसे अधिक सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध अपनी निजी राशि वृश्चिक (29 अक्तूबर (21 जून से 20 जुलाई), इनके पीछे के संधिकाल में जन्मे व्यक्तियों के साथ रहेंगे। वे अपनी राशि से सातवीं वृष (21 अप्रैल से 20-27 मई) के दौरान जन्मे लोगों से भी काफी प्रभावित से 20 नवम्बर), जल-त्रिकोण की अन्य राशियों मीन (19 फरवरी से 20 मार्च) तथा कर्क होते हैं। नवम्बर (November)
21 अक्तूबर से वृश्चिक राशि प्रारम्भ हो जाती है, लेकिन सात दिन तक पूर्व राशि तुला के साथ इसका संधि-काल चलता है, अतः 28 अक्तूबर तक यह पूर्ण प्रभाव में नहीं आ पाती। उसके बाद 20 नवम्बर तक इसका पूर्ण प्रभाव रहता है। फिर आगामी राशि धनु के साथ संधि-काल प्रारम्भ हो जाने के कारण सात दिन तक इसके प्रभाव में उत्तरोत्तर कमी होती जाती है। वृश्चिक जल-त्रिकोण की दूसरी राशि है और इसका स्वामी मंगल (सौम्य) है। इस अवधि अर्थात् 21 अक्तूबर से 20-28 नवम्बर तक जन्मे व्यक्ति या तो बहुत अच्छे होते हैं या बहुत बुरे। लगभग इक्कीस वर्ष की आयु तक वे अत्यंत पवित्र हृदय और धर्मात्मा होते हैं। लेकिन यदि उनकी काम-भावना जाग उठे तो प्रायः वे इसकी उलटी दिशा में मुड़ जाते हैं। फिर भी, कुछ अत्यंत उदात्त मनुष्य इस राशि में पैदा हुए हैं। लेकिन सभी अत्यंत भावुक होते हैं जो उनकी प्रकृति के सभी रूपों की विशेषता है। इस अवधि में पैदा हुए लोगों में असाधारण आकर्षण-शक्ति होती है। वे उत्तम डॉक्टर, सर्जन, कष्टहर्ता, उपदेशक और वक्ता बनते हैं। सार्वजनिक जीवन में श्रोताओं पर उनका
भारी प्रभाव पड़ता है जिन्हें वे अपनी इच्छानुसार किसी दिशा में मोड़ सकते हैं। उनका भाषा पर अधिकार होता है, बोलने और लिखने दोनों में, और अपनी वर्णन-शैली में अत्यंत नाटकीय होते हैं। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि जिसके सम्पर्क में आते हैं, उसी जैसे बन जाते हैं। फलस्वरूप उन्हें प्रायः दूसरों के दोषों के लिए भुगतना होता है। यदि वे इस राशि के उच्च धरातल वाले हों तो मानवीय, अत्यंत उदार और आत्म-त्यागी होते हैं। संकट काल और आपात स्थिति में शांत और दृढ़-संकल्पी रहते हैं तथा उन पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। व्यापार, राजनीति, साहित्य या जिस ओर भी दिमाग लगाएँ,
विचारों में अत्यंत भौतिक होते है?

Translate
X

SELECT LANGUAGE

Call Us : +91 11-35565285